सफल चिड़ियाँ की कहानी (ज्ञान को बढ़ाएं)

आज हम एक सफल चिड़ियाँ की कहानी के बारे में जानेंगे. बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी जरूर ही सुनी होगी यदि नहीं सुनी है तो कोई दिक्क़त नहीं आज आप जान जायेगें.


चलिए बिना कोई देरी किये कहानी सुरु करते हैं. यह कहानी एक छोटी सी चिड़िया की है जो की दानों (अनाज ) को चुन - चुन कर कुछ खाती और कुछ घर लती. इस छोटी सी चिड़िया का घर एक पेड़ के टहनियों पर था.

Safal Chiriyan Ki Kahani
सफल चिड़ियाँ की कहानी

ज़ब चिड़िया दाना चुन चुन कर अपने घोसले में जमा करती पर जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था. चिड़िया ने पेड़ से बहुत ही अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने को तैयार थी.


तब हार कर चिड़िया बढ़ई (लकड़ी काटने वाले)  के पास गई और उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि पेड़ उसका जमा किया दाना उसको नहीं दे रहा है. भला ऐसा होता की एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ काटता. तभी बढ़ई ने पेड़ काटने से इनकार कर दिया.


तब चिड़िया निराश होकर राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि आप बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा. तभी राजा ने उस छोट्टी सी चिड़िया को डांट धोप कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार कहाँ मानने वाली थी.


फिर चिड़िया हारकर हाथी चालक के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता. जिसके कारण बढ़ई पेड़ नहीं काटता. पेड़ नहीं काटने के कारण पेड़ उसका दाना नहीं देता. महावत ने भी उस छोटी सी चिड़िया को दाट कर भगा दिया.


चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को हाथी से दुहराया कि अगली बार जब महावत (चालक) तुम्हारी पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वो राजा को निचे गिराने को तैयार नहीं है.


राजा लकड़ी काटने वाले को सजा देने को तैयार नहीं है जिसके कारण बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं है. और पेड़ दाना देने को राजी नहीं। हाथी बिगड़ गया उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच रही है.


चिड़ियाँ हर जगह से हारकर अंत में चींटी के पास गई और वही अनुरोध को दोहरा कर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ. फिर अंत में चींटी ने चिड़ियाँ से कहा की चल भाग यहां से. क्या मैं तुम्हें एक दाना के लिए हाथी की सूंढ़ में घुस जाऊ.


अब तक अनुरोध की विनीती में चिड़िया गुस्सा में आग बबूला हो गया. उसने कहा कि चाहे मैं पेड़, लकड़ी काटने वाले, राजा, हाथी चालक और हाथी का कुछ नहीं बिगाड़ पाऊं पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा तो सकती ही हूँ ना.


तब चींटी डर गई और भाग कर वो हाथी के पास गई. जब चिट्टी हाथी के पास पहुँचा और वो यह बात बताई तो हाथी दौड़ता हुआ हाथी चालक के पास पहुंचा. जब हाथी चालक ने यह बात जानी तो हाथी चालक राजा के पास गया और राजा से कहा कि हुजूर चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा. राजा ने तभी तुरंत ही बढ़ई को बुलाया उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा. बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा और तभी बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला हिलहिला उठा कि मुझे मत काटो. मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा...!!


Conclusion (निष्कर्ष)


यह सफल चिड़ियाँ की कहानी आपको अपनी ताकत को दिखाने का कार्य करती है. अब आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा. आपको यह पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह कमजोर होंगे, लेकिन आप भी अपने ताकत और हौसले के बल पर बड़े बड़े काम आसानी से कर सकते हैं. आप अपने आप को पहचाने ना की अपने आप से भागे और यह कभी नहीं सोचें की मैं कुछ बही कर सकता. सायद आपने यह कहावत सुना होगा की "शेर पर सवा शेर!!" बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं.

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